Saturday, September 19, 2026
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आरक्षण हटाने के लिए जंतर-मंतर पर जुटे सवर्ण, अठावले ने कहा- हट ही नहीं सकता

एससी-एसटी और ओबीसी आरक्षण, यूजीसी का समानता वाला कानून,एससी-एसटी एक्ट आदि को हटाने की मांग को लेकर सवर्ण समाज के युवा आंदोलन कर रहे हैं.शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण विरोधी युवाओं ने प्रदर्शन किया. इन प्रदर्शनकारी युवाओं की मांग है कि सकारात्मक भेदभाव की नीतियां जाति के बजाय आर्थिक आधार पर तय की जाएं. प्रदर्शन ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ नामक एक इंस्टाग्राम पेज की अपील पर आयोजित किया गया. इस बीत उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा है कि आरक्षण सुधार आंदोलन कर रहे छात्रों और युवाओं की मांगों पर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व गंभीरतापूर्वक विचार करेगा. उन्होंने कहा है कि इस मामले को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा. वहीं केंद्रीय मंत्री मंत्रियों ने कहा है कि आरक्षण एक संवैधानिक व्यवस्था है, इसकी समीक्षा नहीं हो सकती है. इस प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर माहौल गर्म है.

कौन लोग आए थे प्रदर्शन करने

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वालों में अधिकांश पुरुष थे. वे बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लेकर पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए. कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में ‘क्रीमी लेयर’ का प्रावधान लागू करने की भी मांग की. उन्होंने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित नीतियों में बदलाव की मांग भी की.इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और उच्च शिक्षा से जुड़ी नीतियों,जिसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का ढांचा भी शामिल है, से संबंधित मुद्दे भी उठाए.

दिल्ली पुलिस के पुलिस सूत्रों ने बताया है कि सुबह जंतर-मंतर पर जुटे कुछ लोगों को वहां से हटा दिया गया, क्योंकि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी. उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मी इलाके की ओर आने वाले लोगों की भी जांच कर रहे थे.कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थल के आसपास इंटरनेट जैमर लगाए गए थे, जिससे इलाके में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया था.पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी. इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. प्रमुख स्थानों पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए थे. प्रदर्शन स्थल के आसपास अवरोधक लगाए गए थे.

यूपी के डीप्टी सीएम से मिले प्रदर्शनकारी

इस प्रदर्शन के बाद शनिवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने इस आंदोलन के नेता हर्ष दुबे के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. उन्होंने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को अगले दो दिन में केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा और केंद्रीय मंत्री के साथ उनकी बैठक कराई जाएगी.

इस बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शनिवार को कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है. इसे खत्म करने की मांग को उन्होंने ‘असंवैधानिक’ बताया.बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री आठवले ने कहा कि कुछ लोग आरक्षण समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ अन्य ने इसके खिलाफ सोशल मीडिया अभियान चलाए हैं. उन्होंने कहा,”कुछ लोगों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते हुए आरक्षण खत्म करने की मांग की, जबकि कुछ अन्य ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर इसे समाप्त करने की बात कही. लेकिन, आरक्षण को खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हमारा संवैधानिक अधिकार है.” उन्होंने कहा कि आरक्षण का विस्तार अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) तक हुआ है. उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि सभी जरूरतमंद वर्गों को इसका लाभ मिल रहा है.

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