कांग्रेस ने शनिवार को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में छात्रों की गूंज कार्यक्रम का आयोजन किया. इस बार खास बात यह रही है कि इसे केवल लड़कियों के लिए आयोजित किया गया था.राहुल गांधी के इस कार्यक्रम में उम्मीद से अधिक लड़कियों ने भागीदारी की. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने ‘मनुस्मृति’ के उस नियम को ‘शर्मनाक’ बताया, जिसके अनुसार महिला को जीवन के हर चरण में पुरुष रिश्तेदारों के अधीन रहना चाहिए.उन्होंने कहा कि महिलाओं का अपनी अस्तित्व है और उनकी पहचान को उनके पिता, पति या बेटों के अधीन नहीं रखा जाना चाहिए.इससे पहले कांग्रेस राजस्थान के कोटा,उत्तराखंड के देहरादून और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित किया था.
महिलाओं के अधिकार पर हमला
पुणे के एसएसपीएमएस कॉलेज के मैदान पर आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत यहां की 70 करोड़ महिलाओं की अनोखी यात्राएं, अनोखी कल्पनाएं और अनोखे सपने हैं. राहुल गांधी ने कहा,”मैं यहां मनुस्मृति का जिक्र करना चाहूंगा, जिसमें साफ कहा गया है कि बचपन में महिला को अपने पिता के अधीन रहना चाहिए, जवानी में वह अपने पति के अधीन होती है और जब उसका पति मर जाता है, तो वह अपने बेटों के अधीन होती है. महिला को कभी भी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए. ये शब्द शर्मनाक हैं.ये शब्द नहीं कहे जाने चाहिए.”
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि महिलाएं देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं और उन्हें अपने लिए खड़ा होना चाहिए और खुद पर भरोसा करना चाहिए. उन्होंने कहा, ”आप खुद के अलावा किसी और के अधीन नहीं हैं. पिता, भाई, पति या बेटे के साथ आपका रिश्ता तो है, लेकिन आप उनके अधीन नहीं हैं, आपकी अपनी खुद की पहचान है.” उन्होंने कहा कि वह यहां भाषण देने या राजनीति पर चर्चा करने नहीं, बल्कि युवाओं को अपनी भावनाएं व्यक्त करने और अपने विचारों पर चर्चा करने का मौका देने आए हैं.
बेटी, पत्नी या मां, तक सीमित क्यों रहें महिलाएं
दर्शकों से ‘पिंजरा तोड़ने’ का आह्वान करते हुए गांधी ने युवाओं से कहा कि हर व्यक्ति अनोखा होता है और उसके अपने सपने और दृष्टिकोण होता है. कांग्रेस नेता ने कार्यक्रम में आईं लड़कियों को संबोधित करते हुए कहा,”आप अनोखे हैं, आप खास हैं, आप एक व्यक्ति हैं और आपके अपने सपने हैं.” यह बताते हुए कि वह महिलाओं को देश की बड़ी संपत्ति क्यों मानते हैं, गांधी ने कहा,”मेरा तर्क यह है कि महिलाएं स्वभाव से पुरुषों की तुलना में अधिक संवेदनशील, अधिक सौम्य, अधिक दयालु और अधिक दूरदर्शी होती हैं.”
कांग्रेस नेता ने कहा कि महिलाओं को अक्सर तीन पहचानों -बेटी, पत्नी या मां, तक ही सीमित रखा जाता है. उन्होंने कहा कि हालांकि इन रिश्तों में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन ये उनकी एकमात्र पहचान नहीं हो सकतीं. गांधी ने कहा कि महिलाएं पेशेवर और खिलाड़ी बनती हैं और कई क्षेत्रों में सक्रिय रहती हैं, लेकिन अक्सर पुरुषों के साथ उनके रिश्तों के जरिए ही उनकी पहचान तय की जाती है.


